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Monday, March 27, 2023

यहां गांव-गांव गुगो , गोगाजी महाराज के समाधि स्थल पर राजस्थान सहित भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं।

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गोगाजी के भक्तजन गर्मी व उमस की बिना परवाह किए ढोल-नगाड़ों व डमरू, सारंगी के साथ नाचते गाते जय-जय बागड़ वाले गुगावीर के गीत गाते, पीले वस्त्र धारण किए, कनक दंडवत करते, गोगा भक्त अपने शरीर पर छड़ी से वार करते हुए एक समूह में गोगाजी का एक निशान लेकर चलते हैं जिसे नेजा कहा जाता है। मेले के दौरान यहां गोगाभक्तों का जोश देखने लायक होता है। मेला क्षेत्र में अस्थाई बाजारों में नाना प्रकार के साजो-सामान की दुकानें सजी हुई देखी जाती हैं। इससे गोगामेड़ी के आस-पास क्षेत्र के दर्जन भर गावों के लोगों को एक माह के लिए रोजगार मिल जाता है।
एक समूह में गाेगाजी का एक निशान लेकर चलते हैं भक्त, कहलाता है नेजा
उत्तर भारत का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल एवं बागड़ धाम गोगामेड़ी में लोक देवता जाहरवीर गोगाजी महाराज का भव्य मंदिर है। मुख्य मंदिर में जाहरवीर गोगाजी महाराज की समाधि बनी हुई है।
गोगाजी महाराज के समाधि स्थल पर राजस्थान सहित भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं। खास कर उत्तर प्रदेश में गोगाजी की मान्यता ज्यादा है। गोगाजी की याद में हर वर्ष भादवे के माह में लगातार एक माह तक गोगामेड़ी का मेला भरता है।
गोगाजी की मान्यता की व्यापकता इस कहावत से प्रमाणित होती है कि ‘गांव-गावं गुगो, गांव-गांव खेजड़ी’ यानी राजस्थान में खेजड़ी व जाळ के पेड़ और गोगाजी के थान यानी (मेड़ी) अधिक संख्या में मिलेंगे। मेले के अलावा भी गोगामेड़ी में बारहमासी श्रद्धालुओं का अावागमन रहता है। वर्तमान में गोगाजी मंदिर पर करोड़ों रुपयों के खर्च से जीर्णोद्धार किया गया है। इससे गोगाजी मंदिर नया और भव्य स्वरूप धारण किए हुए हैं। निकट भविष्य में गोगामेड़ी को विश्व पटल पर देखा जा सकता है।
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